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तेरे दर की हो ख़ैर, शह-ए-अजमेर | कर दो करम, मोरे ख़्वाजा / Tere Dar Ki Ho Khair, Shah-e-Ajmer | Kar Do Karam, More Khwaja

कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! तेरे दर की हो ख़ैर, शह-ए-अजमेर ! मिटे ग़म की अँधेर, शह-ए-अजमेर ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! फ़रियाद सुनो मोरे नैनन की कहती है लड़ी ये अँसुवन की चलती है कटारी दुश्मन की कर दो उन्हें ज़ेर, शह-ए-अजमेर ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! ए रब के वली प्यारे ख़्वाजा ! भारत की ज़मीं के महाराजा ! मुश्किल में हैं अब तेरे शैदा है ज़ुल्म घनेर, शह-ए-अजमेर ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! नफ़रत की नज़र, उल्टी बोली इस बाग़ में ज़ाग़ की है टोली बुनियाद मोहब्बत की डोली आपस में है बैर, शह-ए-अजमेर ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! गिरती हुई आस सँभल जाए मज़लूम का हाल बदल जाए तुम चाहो तो आज ही टल जाए दुख-दर्द का फेर, शह-ए-अजमेर ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! सख़ियों के सख़ी ! ए ग़रीब-नवाज़ ! ए चर्ख़-ए-विलायत के शहबाज़ ! सुन लीजे फ़रीदी की आवाज़ हम सब हों ब-ख़ैर, शह-ए-अजमेर ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! कर दो करम, मोरे ख़्वाजा ! शायर: अल्लामा सलमान ...

सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! / Sat-Rangi Phoolon Ke Gulshan, Ai Mere Watan ! Mahboob Watan !

सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! बे-दाग़ रहे तेरा दामन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! तू 'इल्म-ओ-हुनर का मरकज़ है, तू 'अक़्ल-ओ-ख़िरद का मेहवर है तू अहल-ए-वतन की है जन्नत, तू हुस्न-ओ-'इश्क़ का साग़र है बा-फ़ैज़ हैं तेरे दश्त-ओ-दमन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! जाने कितनी नज़रें उट्ठीं तेरी नौ-ख़ेज़ बहारों पर अँधियारों ने भी दस्तक दी तेरे फ़िरदौसी उजियारों पर है सुब्ह तेरी फिर भी रौशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! ये इन्द्र-धनुष प्यारे प्यारे क्या दिलकश धूप खिलाते हैं जल-थल, नदियों के गहवारे, तारों को झूला झुलाते हैं जगमग जगमग तेरा दर्पन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! तेरी ख़ातिर दीवानों ने, अलबेलों ने, मस्तानों ने इस मिट्टी पर क़ुर्बान किया है ख़ुद को वीर जवानों ने शादाब रहेगा तेरा चमन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! सत-रंगी फूलों के गुलशन, ए मेरे वतन ! महबूब वतन ! मेहदी ! वो हिमालय की चोटी ...

क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का / Qalam Likh Ishq Mein Kho Kar Qaseeda Ibn-e-Haidar Ka

क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का शहीदों में बड़ा ऊँचा है रुत्बा इब्न-ए-हैदर का क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का कोई कैसे घटा पाएगा उन की शान-ए-आली को ख़ुदा-ए-पाक ने रुत्बा बढ़ाया इब्न-ए-हैदर का क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का जहाँ की रिफ़अ'तें क़ुर्बान जाएं उन के क़दमों पर शब-ए-मेअ'राज का दूल्हा है नाना इब्न-ए-हैदर का क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का हुसैनी नौ-जवाँ आता रहेगा हर ज़माने में मेरी नस्लों में गूँजेगा तराना इब्न-ए-हैदर का क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का कोई भटका नहीं सकता, कोई बहका नहीं सकता के अपनाया है दिल से हम ने रस्ता इब्न-ए-हैदर का क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का यज़ीदी गर्दनें झुकती रहेंगी ता-अबद, मेहदी ! क़यामत तक रहेगा बोल-बाला इब्न-ए-हैदर का क़लम लिख इश्क़ में खो कर क़सीदा इब्न-ए-हैदर का शायर: मसूद मेहदी क़ादरी मिस्बाही नातख्वां: मसूद मेहदी क़ादरी मिस्बाही

आए प्यारे नबी / Aae Pyare Nabi

सरकार आए, सरकार आए सरकार आए, सरकार आए आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी ये जहाँ दर्द-ओ-ग़म के अँधेरे में था नूर ख़ुशियों का फूटा सहर आ गई रहमत-ए-हक़-तआला ब-शक्ल-ए-नबी चल के जब आमिना बी के घर आ गई या रसूल-ए-ख़ुदा ! आप जैसा हसीं बज़्म-ए-कौनैन में कोई है ही नहीं बोले जिब्रील, ए शाह ! मेरी नज़र आसमान-ओ-ज़मीं छान कर आ गई आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी आख़री हो मेरी ज़िंदगी का सफ़र काश ! आक़ा की चौखट पे रखा हो सर अपनी क़िस्मत की मेअराज समझूँगा मैं मौत आक़ा के दर पर अगर आ गई आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी निसार तेरी चहल-पहल पे हज़ारों ईदें रबीउल-अव्वल सिवाए इब्लीस के जहाँ में सभी तो ख़ुशियाँ मना रहे हैं ईद-ए-मीलादुन्नबी है क्या सुहाना नूर है आ गया वो नूर वाला जिस का सारा नूर है सरकार की आमद ! मरहबा दिलदार की आमद ! मरहबा आक़ा की आमद ! मरहबा दाता की आमद ! मरहबा सब झूम के बोलो ! मरहबा लब चूम के बोलो ! मरहबा आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी आए प्यारे नबी, मेरे प्यारे नबी अत्तह़िय्यात म...